बारां कलेक्टर की कार्यशैली पर सवाल: बंदूक लाइसेंस वितरण में भेदभाव का आरोप

बारां। राजस्थान की भजनलाल सरकार जहाँ एक ओर 'अंत्योदय' और 'सुशासन' के संकल्प को धरातल पर उतारने में जुटी है, वहीं बारां जिले में प्रशासनिक कार्यशैली पर गंभीर सवालिया निशान खड़े हो रहे हैं। आरोप है कि जिला कलेक्टर कार्यालय में आम आदमी और जरूरतमंद व्यापारियों की फाइलों पर धूल जम रही है, जबकि रसूखदारों और 'खास' लोगों को रेवड़ियों की तरह बंदूक के लाइसेंस बांटे जा रहे हैं। मुख्यमंत्री के विजन को दरकिनार कर चलाई जा रही यह 'पिक एंड चूज' की नीति अब तूल पकड़ती जा रही है।

बंदूक लाइसेंस का 'खेल': रसूखदारों की चांदी, आम आदमी परेशान

बारां जिले में पिछले कुछ समय से शस्त्र लाइसेंस जारी करने की प्रक्रिया चर्चा का विषय बनी हुई है। सूत्रों के मुताबिक, जिले के कई वास्तविक जरूरतमंद लोग, जिनमें व्यापारी और वे लोग शामिल हैं जिन्हें जान का खतरा है, सालों से दफ्तरों के चक्कर काट रहे हैं। लेकिन उनकी फाइलों को 'पेंडिंग' लिस्ट में डाल दिया गया है। इसके विपरीत, प्रभावशाली राजनीतिक पहुंच रखने वाले लोगों और 'खास' चेहरों के आवेदन फटाफट स्वीकृत किए जा रहे हैं। सवाल यह उठता है कि क्या आत्मरक्षा का अधिकार सिर्फ रसूखदारों के लिए सुरक्षित है?

CM भजनलाल का विजन दरकिनार: 'अपनों' पर इनायत क्यों?

मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा का स्पष्ट निर्देश है कि सरकारी योजनाओं और सेवाओं का लाभ बिना किसी भेदभाव के अंतिम पंक्ति में बैठे व्यक्ति तक पहुँचना चाहिए। लेकिन बारां में स्थिति इसके उलट नजर आ रही है। जानकारों का कहना है कि प्रशासन कुछ खास लोगों को उपकृत करने में व्यस्त है। पुराने दौर की 'चमचागिरी' की संस्कृति एक बार फिर हावी होती दिख रही है, जिससे प्रबुद्ध जनों और निष्पक्ष पत्रकारों में भारी रोष व्याप्त है।

हाईकोर्ट की दहलीज तक पहुँचेगा मामला

प्रशासन की इस मनमानी के खिलाफ अब कानूनी मोर्चा खोलने की तैयारी कर ली गई है। सूत्रों की मानें तो लाइसेंस वितरण की सूची को सार्वजनिक करने और इसमें बरती गई अनियमितताओं को लेकर जल्द ही राजस्थान हाईकोर्ट में एक जनहित याचिका (PIL) दायर की जा सकती है। कोर्ट में कलेक्टर को यह जवाब देना भारी पड़ सकता है कि किन मापदंडों के आधार पर पात्र लोगों को छोड़कर 'प्रभावशाली' लोगों की फाइलों को प्राथमिकता दी गई। विशेष रूप से उन पत्रकारों और करीबियों की भूमिका भी जांच के दायरे में है, जिन्हें बिना किसी ठोस खतरे के लाइसेंस जारी किए गए हैं।

एक्सपोज न्यूज़ की पैनी नजर: जवाब देना होगा भारी

बारां की जनता अब जागरूक हो चुकी है। पूर्ववर्ती प्रमोद जैन 'भाया' के दौर की राजनीति के बाद, अब प्रशासन की नई कार्यशैली का कच्चा चिट्ठा जल्द ही जनता के सामने होगा। एक्सपोज न्यूज़ इस पूरे 'लाइसेंस खेल' की तह तक जा रहा है। उन चेहरों को बेनकाब किया जाएगा जिन्होंने नियम-कायदों को ताक पर रखकर अपनी ताकत का प्रदर्शन किया है। प्रशासन सावधान रहे, क्योंकि अब पारदर्शिता की मांग बुलंद हो चुकी है।


मुख्य बिंदु:

  • आम आदमी की अनदेखी: जरूरतमंदों की फाइलें सालों से लंबित।
  • रसूखदारों को तवज्जो: प्रभावशाली चेहरों को नियम विरुद्ध प्राथमिकता।
  • कानूनी कार्रवाई: हाईकोर्ट में चुनौती देने की प्रबल संभावना।
  • प्रशासनिक लापरवाही: CM के विजन 'गरीब को राहत' की खुली अवहेलना।

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