प्राकृतिक खेती से बदल दी खेती की तस्वीर, किसानों को दे रहे मुफ्त जीवामृत – रामनिवास गौड़
झालावाड़। जिले की पचपहाड़ तहसील के मिश्रौली गांव के किसान रामनिवास गौड़ प्राकृतिक खेती के जरिए किसानों के लिए प्रेरणा बन रहे हैं। महज नौवीं कक्षा तक पढ़ाई करने वाले रामनिवास गौड़ ने अपनी मेहनत और नवाचार से खेती में ऐसा मॉडल तैयार किया है कि अब कृषि विभाग भी अन्य किसानों को उनके खेत का भ्रमण करवा रहा है।
रामनिवास गौड़ ने बताया कि कोरोना काल के दौरान स्वास्थ्य को लेकर बढ़ती चिंता के बीच उन्होंने रासायनिक खेती छोड़कर प्राकृतिक खेती अपनाने का फैसला किया। शुरुआत में उत्पादन कम हुआ, लेकिन रासायनिक खाद और दवाइयों का खर्च बचने से खेती की लागत काफी कम हो गई।
गौ आधारित प्राकृतिक खेती को दिया बढ़ावा
रामनिवास गौड़ पिछले करीब छह वर्षों से गौ आधारित प्राकृतिक खेती कर रहे हैं। उनके पास तीन-चार गायें हैं जिनसे मिलने वाले गोबर और गोमूत्र का उपयोग खेती में किया जाता है।
वे खेतों में जीवामृत, घनजीवामृत, ह्यूमिक एसिड, सरल कंपोस्ट खाद, गोबर का घोल और दशपर्णी अर्क का उपयोग करते हैं। फसलों में कीट प्रकोप को रोकने के लिए दशपर्णी अर्क काफी प्रभावी साबित हो रहा है।
किसानों को सिखा रहे जीवामृत बनाना
रामनिवास गौड़ आसपास के किसानों को प्राकृतिक खेती के प्रति जागरूक कर रहे हैं। वे किसानों को निःशुल्क जीवामृत कल्चर भी उपलब्ध कराते हैं ताकि किसान इसे अपने खेतों में उपयोग कर सकें।
किसानों को वे दो लीटर की बोतल में जीवामृत कल्चर देते हैं, जिसे किसान अपने खेतों में गोमूत्र, आटा और गुड़ मिलाकर बड़ी मात्रा में तैयार कर लेते हैं। इससे खेती की लागत कम होती है और मिट्टी की उर्वरता भी बढ़ती है।
महाराष्ट्र से लिया प्रशिक्षण
प्राकृतिक खेती को बेहतर तरीके से समझने के लिए रामनिवास गौड़ महाराष्ट्र जाकर प्रशिक्षण भी ले चुके हैं। वहां से वे WS-46 वैरायटी के पपीते के पौधे लेकर आए हैं और इस वर्ष एक बीघा जमीन में पपीते का बाग तैयार कर रहे हैं।
सितंबर महीने तक इसकी पहली फसल आने की उम्मीद है। इससे पहले वे करीब साढ़े तीन एकड़ जमीन में गेहूं, चना, मसूर, धनिया, उड़द, सोयाबीन और मक्का की खेती कर चुके हैं।
प्राकृतिक खेती से लागत कम, मुनाफा ज्यादा
रामनिवास गौड़ के अनुसार प्राकृतिक खेती में फसल की लागत रासायनिक खेती की तुलना में लगभग 20 प्रतिशत ही आती है। जैविक फसलों का बाजार में बेहतर दाम मिलता है।
उनका गेहूं करीब 45 से 50 रुपये प्रति किलो तक बिक रहा है। इससे एक सीजन में लगभग ढाई से तीन लाख रुपये तक की बचत हो जाती है।
किसानों के लिए बन रहे प्रेरणा
रामनिवास गौड़ के खेत पर कृषि विभाग के अधिकारी समय-समय पर विजिट करते हैं। आसपास के कई किसान उनसे प्रेरित होकर प्राकृतिक खेती की शुरुआत कर चुके हैं।
आसपास के करीब 20-25 किलोमीटर क्षेत्र में प्राकृतिक खेती के तहत यह पहला पपीता बाग होगा।
कई बार हो चुके सम्मानित
खेती में नवाचार के लिए कृषि विभाग द्वारा रामनिवास गौड़ को कई बार सम्मानित भी किया जा चुका है।
उन्होंने बताया कि खेती के साथ-साथ गौ पालन से परिवार को दूध और घी भी पर्याप्त मात्रा में मिल जाता है।
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